क्रोध को कैसे काबु करें

क्रोध को कैसे काबु करें
Angery


कई लोग कहते हैं के हमे गुस्सा बहोत आता है। बहुत सोचते है के गुस्सा नही करेंगे पर हर बार फैल हो जाते है। कसमे भी खाते है के अब और गुस्सा नही करेंगे। लेकिन फिर भी गुस्सा आजाता है।

क्रोध
क्रोध एक ऐसा चिज है जो आप के प्यारे से प्यारे रिशते मे जहर भर सकते है। क्रोध सबसे पहले आप के मन मे जहर भरता है। आप की जीन्दगी मे जहर भरता है। और आप की पुरी दुनिया मे भी जहर भरता है। जो इनसान क्रोध करता है। वह क्रोध करने से पहले भी दुखी रहता है। और क्रोध करते समय भी दुख को पाता है। और क्रोध करने के बाद भी दुखी होता है।

विचार
आप खुद कभी विचार करके देखना क्या आप को कभी क्रोध कर के खुशी मिली सुख मिला। किया आप कभी अलाउ करेंगे किसी को अपने उपर गुस्सा करना, क्रोध करना के हमे जो चाहे बोल दे। जैसे चाहे बोलदे । कोई भी व्यक्ति किसी का भी क्रोध पसंद नही कर सकता। तो हमारे क्रोध को कोई क्यों सुविकार करेगा।

एक लाभ दायक कहानि
एक व्यक्ति एक गुरू जी के पास गया और गुरुजी को जा के बोला गुरूजी मुझे बहोत कध्रो आता है। और उस क्रोध की वजह से मेरे घर वाले सब मुझ से खफा रहते है। और उस क्रोध की वजह से मुझे भी बहोत पश्चाताप रहता है। मै लोगों से नजरे नही मिला पाता। ऐसे ऐसे शब्द मै क्रोध मे कह जाता हुँ। जिनको बाद मे लोटाया नही जा सकता। याद रखना एक बात जो भी शब्द आप कध्रो मे कह जाते है। हो सकता है कि आप को उन की माफी मिल जाऐ पर लोग उन शब्द को भुलते नही तो याद रखना जो भी आप क्रोध मे शब्द कहेंगे । उन शब्दो का सामना आप को भी जिन्दगी भर करना परेगा। तो उसने गुरूजी से कहा मैने खुद से परेसान हो गया हुँ। बहोत कोसिस करता हुँ पर गुस्से कि आदत छुटती ही नही। गुरुजी ने कहा एक काम करो। जब भी तुम्हे गुस्सा आऐना तो बस एक बात याद रखना गुस्सा तो मै करुंगा पर आज नही कल। जब भी मन मे गुस्सा आए बस इतना संयम मन मे रखना के गुस्सा तो मै करुंगा पर आज नही कल करुंगा मै गुस्सा तो उसने बोला गुरुजी इस से थोडी़ गुस्सा सान्त हो जाऐगा दुसरे दिन भी तो गुस्सा करुंगा ना। गुरुजी ने कहा तुम ये कर के तो देखो। वह व्यक्ति घर गया उसे किसी बात पे गुस्सा आया तो उसे गुरु जी की बात याद आई गुस्सा तो मे करुंगा पर आज नही कल करुंगा। कल तो दुर की बात है थोडी़ बाद ही उस का गुस्सा सांत हो गया। याद रखना एक बात गुस्सा एक धुंऐ की तरह है। जो थोडी़ देर रह कर फिर आगे कि ओर चला जाता है। बस व थोडी़ देर हम को संयस साधना है। बस वह थोडी़ देर हम को कंट्रोल करना है। हम बरदास्त नक्ही कर पाते चिजों को। कई लोग कहते है हम गुस्सा करते नही हो जाता है। लोग हमे गुस्सा दिला देता है। तुम कोई टिवी हो किया जो लोगों के कंट्रोल मे रहते हो लोग जो चेनल लगाना चाहे लगादे और तुम अपना पफ्रोर्म दिखाओ लोगों को। लोग आज-कल हलके क्यो हो गये हैं। कितना आसान हो गया है किसी को भी गुस्सा दिलाना और किसी को खुश करना इतना मुश्किल कयो हो गया है। क्योकि हमरी एक गंदी आदत है। हम हर बुरी बात का आरोप दुसरे पर डाल देते है। कि जो भी हुआ उस की वजह से अगर व नही होगा तो कोई ओर होगा या तो ऐसा हो आप के लिए पुरी दुनिया ही बदल जाऐ दुनीया का एक - एक इनसान बदल जाऐ । ताकि आप को गुस्सा नही आये दुनिया कि हर चिज बदल जाये हर नियम बलल जाये ताकि आप को गुस्सा नही आये। याद रखना आप को फीर भी गुस्सा आऐेगा। क्योंकि लवा आप के भीतर है। बाहर के लोग तो नियमित है। उस गुस्से को बाहर निकालने के लिऐ व तो आप ने भर ही रखा है अपने भीतर। बस जरुरत है खुद को पहचान्ने कि। जैसे उस लड़के को गुरुजी ने कहा के गुस्सा कल करेंगे। बस थोडी़ देर का संयम और गुस्सा गायब।

 गुस्से को कंट्रोल करना
कई लोग कहते है के गुस्से को कंट्रोल नही किया जा सकता गुस्सा कोई रोकने वली चिज थोडी़ होती है। जब गुस्सा आजाता है तो आजाता उस समय थोडी़ देखा जाता कौन छोटा कौन बढा़ । आप को सब दिखाई देता है। आप उसी पे गुस्सा करते हो जो आप से कमजोर कहो आप से छोटा हो अपने बोस के उपर गुस्सा कर के दिखाओ। किसी पहलवान के उपर गुस्सा कर के दिखाओ जो आप से सक्ति म ज्यादा हो। गुस्सा हम कमजोर पर ही करते। जो व्यक्ति हम से बडा़ हो शक्ति मे ज्यादा हो पोजिसन मे ज्यादा हो हम उस पे गुस्सा नही करते । क्योकि यहा पता है यहा हमे नुकसान हो जाऐगा। इसका मतलब गुस्सा भी हम इच्छा अनुसार करते है। किस पे गुस्सा करना है किस पे नही करना है। याद रखे एक बात की गुस्सा करना आप कि इच्छा पर निर्भर करता है। आप चाहे तो गुस्सा करें या आप चाहे तो गुस्सा नही करें ये आप की इच्छा पर निर्भर करता है। जो हम से शक्ति मे बडा़ है। उस से हम तो गुस्सा कर नही पाते। और जो हम से कमजोर है उसे पे हम अपना गुस्सा का पर्दर्शन करते नजर आते है।

हिनसा
कई बाते हमने ऐसी भी सुनी है के कई लोग गुस्से मे आ के हिनसा भी करते है। कई पति लोग अपनी पतनियों पे हाथ उठाते है। कितनी गलत बात है। जो व्यक्ति अपने ही परिवार के सदस्यों से हीनसा करे। उसे मनुष्य कैसे कहा जाऐगा  मारी प्रार्थाना सभी माताओ बहनों और देवियों से है। आप भी अपने जिवन मे हिनसा का विरोध किजिए । चुप कर के मत सहीए । जब आपके साथ ऐसा हो तभी रोक दिजीए । इसे आदत मत बन्ने दिजीए। अपनी शक्ति आप खुद बनिए । ऐसी बहोत बातें सुनते है। बहोत मातोओ और बहनो पे अत्याचार होता है। इस इनतजार मत बैठे रहीऐ के आयेगा कोई आप की रक्षा के लिए। सबसे पहले आप खुद की रक्षा खुद करना सिखाए। पहली बार मे ही विरोध किजिए इसे आदत मत बन्ने दिजिए।

कई बार तो एसे किस्से सुन्ने को मिलते है जिन मे काफी दर्द भरा रहता है।
लोग कैसे इतने निर्द्य हो सकते है। आप इस चिज का विरोध किजिए। इसे सहीऐ मत्त क्रोध एक एसी अगनी है। जो सिर्फ क्रोध करने वालों को नही उसकी पुरी दुनिया को जला डालती है। उसके पुरे परिवार को जला डालती है। क्रोधित इनसान के साथ रहना साक्षात नर्क मे रहने के समान है। एक घर मे एक शास अपने बहु से बहुत क्रोध करती थी। बहु बेचारी चुप कर के सब सहती थी। पर वह बहुत परेशान और दुखी रहने लगी और सोचने लगी की आखिर कब तक सहुंगी मै कब इन बातों का अन्त होगा। एक दिन उसके सहर मे एक महात्मा आऐ उसने महात्मा को सारी बात बताई। महात्मा ने कहा जब भी तुम्हारी साश तुम पे गुस्सा करे न तो तुम उसकि आवाज रिकोडिंग कर लेना और जब भी गुस्सा करे तो उस कि रिकांडिग को चला देना। वह बोली ठिक है। उसने वैसा हि किया। उस कि साश ने जेसे ही गुस्सा किया उसने सारी रिकांडिग कर ली। दुसरी बार जैसे ही गुस्सा करने लगी उस की साश इसने वह रिकांडिग चला दी। उस आवाज को सुनकर उस की साश को बहुत अजीब लगा। उस की साश ने बोला यह कौन है इतनि गंदि गंदि आवाज इतने गंदे गंदे शब्द कौन बोल रहा है। इतने गंदे शब्द का इसतमाल कौन कर रहा है। किस की यह आवाज है। तुम मुक्षे कियों सुनाती हो यह आवाज। उस की बहु ने बोला यह आप कि आवाज है। और यह सारे शब्द भी आप कि ही है। जब उस कि सास ने पुरी रिकांडिंग सुनी तो उसे बडा़ अफसोस हुआ। इतनि गंदि अवाज इतने बुरे शब्द मेरे मुह से निकलते है। उस दिन उस कि गलती का ऐहसास हुआ

रिश्ता
रिश्ता चाहे कोई भी हो। लैकिन जहां क्रोध आजाता है वहां खटाश आजाती है़। वहा लोग खुश नही रह पाते कई लोग कहते है के फिर तब हम किसी को कुछ कहे ही नही। ऐसी बात नही है प्रमात्मा ने आप को विवेक दिया है। बातों को समक्षे कि कौनसी बात किस विश्य मे की जा रही है। यह बात खास करके उन लोगों के लिए है। जिन के जिवन मे क्रोध की वजह से जहर भर गया है। यदि आपके बच्चे गलत राश्ते मे जाते है तो आप का फ्रज है उन को समक्षाना। किसी की भलाई मे थोडा़ उपर से गुस्सा दिखाने मे कोई बुराई  है।

गुस्सा और क्रोध यह दोनो अलग चिज है।
आपने गुस्सा किया कुछ टाम बाद बोली यह बात बुरी हो गई। लैकिन क्रोध एक ऐसा चिज है। जो आप क्रोध करने से पहले भी जलते है। क्रोध करते वक्त भी जलते है। और क्रोध के बाद भी जलते है। वही बातें आपके मन मे चलती रहती है। तो उन बातों को सुधारना है। कभी अपने लिए अपने परिवार की भलाई के लिए या बच्चों के लिए कुछ बोलना परा तो ईसमे कोई बात नही। दो बात बोल दी भीर खतम। पर उन बातों को दिलमे बिठा कर मत रखिऐ। उसको क्रोध कि अगनी मत बनाऐ। बातें बोल के आगे बड़ जाऐ। न आप किसी का क्रोध सह सकते है और न आप किसी का क्रोध सहना पसंद करेंगे। तो कियों इस जहर को आपने जिंदगी मे पाल रखा है। आप जितना इस बिमारी को पालेंगे उतना यह बिमारी बरती जाऐगी। फिर आट खुद का भी दिल दुखांऐगें और अपने परिवार वालों का भी दिल दुखाऐंगे। और खुद की नजरों से भी गिर जाऐंगे और सब की नजरों से भी गिर जाऐंगे। तो छोरिए इस बिमरी को और जब भी गुस्सा आए न तो याद रखना यह बात के आज नही कल करेंगे गुस्सा । बस आप के थोडी़ देर का संयम आप के मन की पुरी अगनी को सांत कर देगा।
SHARE

Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें