अपमान
एसा क्यों होता है। जो अच्छे लोग होते है। या भले लोग होते है। उनहे हमेशा अपमान सेहना परता है। कई लोग तो कहते की हमारा बेवजह अपमान करता है। हम कुछ कहते भी नही तो भी लोग हमारा अपमान करता है। अगर कोई हमे हमेशा तंग करे या बार- बार परेशान करे या ताने मारता रहे आप की हंसी उराता रहे तो हमे किया करना चाहिए। चुप रहकर सब सह लेना चाहिए या फीर जवाब देना चाहीए। जो एक बार अपमान सह ले वह मनुष्य है। जो दो बार आपमन सह ले वह महात्मा है। और जो तीसरी बार अपमान सह लेता है वह व्यक्ति मुर्खों कि गिनती मे आजाता है।
खुद की रक्षा
यदी आप बार-बार अपमान सहते रहेंगे तो आप खुद को अपमानित महसुस करते रहेंगे। और लोग भी आप की कदर करना छोड़ देंगे कोई भी आप को कुछ भी कहते चला जाएगा। यदी आप चहते है़ कोई आप का अपमान न करे। आप को अपन स्विभाव की रक्षा आप को अपनी सम्मान का रक्षा खुद करनी होगी।
सहन सिलता और मुर्खता
सहन सिलता और मुर्खता मे बहोत अनतर है। जो इनसान गलत करता है। अत्याचारि करता है । अन्ययाय करता है। वह तो पाप का भागी है। ही। और जो चुप चाप अन्ययाय को सहता है। वह भी पाप का भागी है। क्योकि अत्याचारि को अन्ययाय को पहली बार मे ही रोक दिया जाए तो उस की हिम्मत बढे़गी नही अगर हम उसे छुट देदेंगे या उसे कुछ नही कहेंगे तो अगली बर वह और हमे सताऐगा। इसलिए आप का धर्म है।आप अपने सम्मान कि रक्षा करो। इस दुनिया मे सबसे महंगी चिज होती है सम्मान ।
सम्मान की अहमियत
यह सम्मान ऐसे ही किसी को मुफ्त मे नही मिल जाता। इस को अपने चरित्र से अपने अच्छे गुण और सोभाव से कमाया जाता है। यदी अपके सम्मान या स्वभिमान पे चोट आऐ तो आप को उसकी रक्षा करनी चाहिए। यदि आप भी चहते है के कोई आप का अपमान न कर सके। कोई आप को या आप के सम्मान और स्वभीमान को चोट न पहुचाऐ तीन बातें आप हमेसा याद रखना।
तीन बाते जो याद रखना है।
1 पहला बात
आप हमेशा अपने आप को Develop किजिए खुद के ज्ञियान को बडा़ते रहीए। हर दिन आप खुद से पुछऐ के आज मैंने जिनदगी मे कया सिखा। किया ज्ञयान प्राप्त किया ज्ञयान सिर्फ किताबी नही किताब के अलावा आप जो जिन्दगी जीते है। अपने जिन्दगी की सफर से ज्ञयान प्राप्त किजीए। किताब भी पढी़ए किताब से आप की बुद्धि कि विकाश होती है। जिससे आप जिनदगी को और बेहतर देख और समझ पाते है।
चेतना
लेकिन अपनी चेतना को अपनी समझ को अपने अनुभव को भी डेव्लप किजिए। खुद पे मेहनत किजिए जितना आप डेव्लप रहेंगे । जितना आप के अन्दर ज्ञयान बडे़गा समझ बडे़गी उतना ज्यादा confidant हो जाएंगे। और आप जितना ज्यादा लाइफ मे confident रहेंगे। आप किसी का भी चुप कर सह नही लेंगे। फिर आप अपने सम्मान की रक्षा खुद करेंगे।
2 दुसरी बात
कई लोग कहते है के हमे कोई भी कुछ बोल जाता है और हम चुप कर के सह लेते है। कया करें कैसे जवाब दे हम। तो आप अपनी इस आदत को बदलए। कई लोग जो सहते रहते है। और जब उन की सहन सक्ति खतम हो जाती है। तब वह बम की तरह फट जते है। जिससे उनके रीश्ते भी टुट जाते है। और खुद ही पछताते है। हम जवाब देते है तो झगडे़ हो जाते है। हम जवाब देते है तो हम ही बुडे़ बनते है। इस का कारण यह है की आप को बात करना नही आता किसी कि बातों का जवाब देने का यह मतलब नही है की हमे झगडा़ करना है। या हमे करोध करना है। अगर कोई आप को कोई ऐसे सबद कहता है। जो अनउचित है तो सहज भाव मे आप को भी उनका उत्तर देना चाहिए। किसी कि बातों का उत्तर देना झगडा़ करना नही होता करोध करना नही होता। और यही कला आप को सीखनी है। बिना करोध किए बिना झगडा़ किए। आप को लोगों की बातों का कैसे उत्तर देना है। कई लोग कहते है हमे नही आता बात करना हम बात करते है। तो झगडा़ हो जाता है। कई लोग कहते है कि हम एक जवाब देते है कि वह दुसरा जवाब देता है। जिससे हम चुप हो जाते है। हम क्या करें हम सही से बात नही कर पाते। देखो जब तक आप बात नही करेंगे तब तक आप बात करना सिख नही पाएंगे। एसे मे तो हर कोई आप को चुप करा के चला जाएगा। जितना आप बातों का उत्तर देंग याे जितना आप बात करेंगे उतना ही आप लोगों की बातो का बेहतर जवाब दे पाएंगे। आप बात ही नही करेंगे आप उत्तर ही नही देंगे तो कैसे आप की बुद्धि और वाणि का विकाश होगा।
एक कहानि
एक व्यक्ति जब तैरना सिखने गया जब वह व्यक्ति सुविमिंग पुल मे उतरा तो उसे तैरना तो आता नही था। तो वह डुबने लगा ट्रेनर वहीं पास मे खडा़ था। वह व्यक्ति हाथ पैर चलाने लगा पर वह डुबता जा रहा था। फिर ट्रेनर ने देखा के यह डुब न जाए तो उस को बचा के बाहर ले आया। वह व्यक्ति पानि से इतना डर गया- इतना डर गया के उसने कहा के मै पनी मे तबही जाउँगा जब मझे तैरना आजाऐगा किया ऐसा समभव है। जबतक कोई व्यक्ति पानी मे जाएगा ही नही तो तरना कैसे सिखेगा। इस का मतलब यह हुआ के जबतक आप लोगों कि बातों के उत्तर नही देंगे या जवाब नही देंगे आप को बात करना कैसे आएगा। आप एसे चुप कर के सहते जाएँगे तो कैसे बात कर पाएँगे आप। याद रखना एक बात आप अगर हर किसी कि बातों को एसे चुप कर के सहते रहेंगे तो आप जिन्दगी भर अपमानित होते रहेंगे। प्रेम भाव से सहज भाव से लोगो के कि बातों का उत्तर देना सिखऐ। बिन क्रोध मे आए यही तो कला है। लोगों को उत्तर देना नही आता कध्रो करना आता है। झगडा़ करना आता है। आप को इनही बातों का अभ्यास करना है की आपको बिना अवेश मे आये बिना कध्रो मे आये। प्रेम भाव से सहज भाव से हमे अपनी स्वभिमान की रक्षा करनी है। लोगों की बातों का उत्तर देना है। चुप कर के कुछ भी नही सहना याद रखना एक बात जब तक आप अपनी रक्षा के लिए उठ खडे़ नही होते तब तक आप की रक्षा के लिए कोई नही आऐगा। जिस दिन आप अपने भितर हिम्मत जगा ली शक्ति जगा ली उस दिन के बाद आप को दुनिया मे कोई नही हरा सकता।
3 तिसरी बात
मुर्ख लोगों से बुरीे संगत से दुर रहीए। क्योकी ऐसे लोग कभी किसी की खुशी नही देख सकते। ऐसे लोगों को दुसरे की खुशी से इर्षिया होती है। ऐसे लोग दुसरे को निचा दिखाने मे निचा गिराने मे ही लगे रहते है। की कैसे भी इसे निचा दिखाऐ इस की हसी उड़ाए इसको तानेमाडे़ ऐसे लोगो का शोभाव ही ऐसा होता है। ऐसे लोग कभी नही बदल सकते तो ऐसे लोगों से आप दुर रहीए। आप जिन्दगी मे इन तीन बातों को याद रखेंगे अपलाई करेंगे तो आप का यकिन्न कोई भी अपमान नही कर सकता। कोई भी व्यक्ति आप कि इनस्लट कर ही नही पाऐगा। तो अपने स्वभिमान की अपने सम्मान कि रक्षा खुद करना सिखें

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